Paper Title
जैविकखेतीएक – परिचय

Abstract
यह पत्र रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करने और सतत विकास के लिए जैविक खेती की भूमिका का विश्लेषण करता है। भारत में, जहां रसायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को कम कर रहा है, जैविक खेती एक टिकाऊ विकल्प के रूप में उभरी है। इस अध्ययन से पता चलता है कि जैविक प्रथाओं (जैसे कि वर्मीकम्पोस्ट, जैविक खाद, फसल चक्र) को अपनाने से मिट्टी में कार्बन की मात्रा, सूक्ष्मजीव गतिविधि और जल धारण क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार होता है। यद्यपि शुरुआती 2-3 वर्षों में उपज में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह न केवल मिट्टी को पुनर्जीवित करती है, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और पोषक तत्वों में भी वृद्धि करती है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि जैविक खेती लागत कम करती है और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है। मुख्य शब्द (Keywords) - जैविक खेती, जैविक घटक, जैव उर्वरक, हरी खाद, सतत कृषि